थाना प्रभारी हजीरा : पहले किया ग्वालियर कलेक्टर को गुमराह फिर माननीय न्यायालय को किया भ्रमित

बिहारी है लपेट दो क्या कर लेगा
  • मामला :- हजीरा थाने में षड्यंत्र साक्ष्यों के आधार पर पंजीबद्ध किया गया प्रकरण क्रमांक 185/20 दिनांक 25/06/2020,
  • गलत जानकारी देकर पीड़ित परिवार को करता रहा गुमराह
  • कुछ आवेदन भी पीड़ित परिवार के द्वारा थाने में दिए गए उनको भी किया गायब

ग्वालियर। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग की जितनी तारीफ की जाए वह कम है लेकिन कुछ निचले अधिकारी की वजह से वरिष्ठ अधिकारियों को भी नीचा देखना पड़ता है। जिससे कहीं ना कहीं पुलिस विभाग की भी किरकिरी हो जाती है। आपको बता दें कि एक ऐसा ही मामला हमारे संज्ञान में आया है। ग्वालियर जिले के हजीरा थाने में एक प्रकरण दर्ज किया गया था जिसका प्रकरण क्रमांक 185/2020 है। उक्त कायमी मिथ्या दर्ज किया गया था । जिसका खुलासा एफ आई आर में बनाए गए अपराधी के परिजनों के द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेजों के आधार पर खुलासा हुआ।

आपको बता दें कि जब हजीरा थाना प्रभारी परिजनों के घर दिनांक 29/06/2020 पुलिस की वर्दी में पुलिसवाला गुंडा बनकर पहुंचे फरियादी फरियादी की फरियाद लेकर थाना प्रभारी हजीरा आलोक सिंह परिहार के द्वारा परिजनों से यह बोला गया कि फरियादी से माफी मांग लो नहीं तो पूरा परिवार को जेल भेज दूंगा अभी मेरे साथ थाने चलो तुम अभी मुझे जानते नहीं हो और आशु तिवारी को कल हाजिर करा देना अगर नहीं कराया तो इसके बाप को जेल भेज दूंगा।

  • माननीय न्यायालय को किया भ्रमित

पीड़ित परिवार भयभीत होकर सुबह माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया माननीय न्यायालय का कागज थाने आते ही थाना प्रभारी के हाथ पैर फूल गए व थाना प्रभारी के द्वारा निचले अधिकारियों से बार-बार फोन करना शुरू हो गया कि इनको को आकर ले जाओ और जो माननीय न्यायालय के समक्ष में बेल के आवेदन प्रस्तुत किया है उसको वापस ले लो। लेकिन थाना प्रभारी की बात को परिजनों के नहीं माना गया व थाना प्रभारी के द्वारा माननीय न्यायालय को यह कहते हुए गुमराह किया गया कि हमने आशु तिवारी के पिता को नहीं उठाया है जब न्यायालय के समक्ष सीसीटीवी फुटेज दिनांक 30/06/2020 को पेश किया गया न्यायालय के द्वारा यह दिशा निर्देश दी गई की इनके विरुद्ध कार्यवाही करो। थाना प्रभारी के द्वारा दिनांक 30/06/2020 को आशु तिवारी के पिताजी के छोड़ दिया गया।

  • पुलिस अधीक्षक पुलिस महा निरीक्षक के समक्ष भी न्याय की गुहार लगाई लेकिन नहीं सुनी गई परिजनों की शिकायत

उसके बाद थाना प्रभारी के द्वारा यह भी बोला गया कि इस बार पैर या हाथ खराब कर दूंगा भयभीत परिजनों के द्वारा तत्काल ग्वालियर पुलिस अधीक्षक अमित सांघी व पुलिस महानिरीक्षक को दिनांक 01/07/2020 को यह घटना के बारे में आवेदन के माध्यम से अवगत कराया गया क्योंकि उस समय ग्वालियर शहर में लॉक डाउन की स्थिति थी। लेकिन दिए गए उक्त आवेदन पर आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। क्योंकि थाना प्रभारी के सांठ-गांठ से थाना हजीरा में जांच के लिए आवेदन आज भी लंबित है। यह जानकारी सूचना के अधिकार से परिजनों को प्राप्त हुई।

  • परिजनों के द्वारा डीजीपी महोदय भोपाल, माननीय मुख्यमंत्री महोदय भोपाल, के समक्ष शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया गया

इसके बाद कार्यवाही ना होने के पश्चात परिजनों के द्वारा दोबारा दिनांक 14/07/2020 को आवेदन पुलिस अधीक्षक ग्वालियर, महा निरीक्षक महोदय ग्वालियर, माननीय मुख्यमंत्री महोदय भोपाल, माननीय डीजीपी महोदय भोपाल, के पास न्याय की गुहार लगाई गई । जिसमें परिजनों के द्वारा यह सूचना दी गई थी मिथ्या दस्तावेज के आधार पर अपराध 185/2020 पंजीबद्ध किया गया है इसकी निष्पक्ष जांच की जाए। लेकिन इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई ।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
  • परिजनों के द्वारा सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत की गई उसको भी पुलिस अधिकारियों के द्वारा विना परिजनों को बताएं शिकायत का निराकरण कर दिया गया

दिनांक 17/07/2020 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज की गई उस शिकायत को बिना परिजनों को बताएं शिकायत का निराकरण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा यह बताते हुए किया गया की ” पुलिस अधीक्षक ग्वालियर के जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना उपरांत शिकायत पर वैधानिक कार्यवाही की गई” परिजनों की शिकायत का निराकरण की जानकारी जब प्राप्त हुई जब सूचना का अधिकार का जवाब हजीरा थाना प्रभारी के द्वारा सत्यापित कॉपी दीया गया । उक्त शिकायत में शिकायतकर्ता के द्वारा प्रकरण क्रमांक 185/2020 की जांच करने के लिए परिजनों ने आवेदन दिया था जबकि थाना प्रभारी द्वारा 158/2020 की जांच करके आरोपी को दिनांक 28/02/2020 गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा गया ।

  • एक ही प्रकरण में अपराधी को तीन बार गिरफ्तार किया जाता है प्रथक प्रथक दिनांक को है ?
  • थाना प्रभारी के द्वारा दिए गए दस्तावेजों के अनुसार अब तीनों बार न्यायालय में पेश किया जाता है ?
  • सवाल यह भी उठता है कि दिनांक 28/02/2020 को अपराधी जब जेल में था तो उसने अपराध कैसे पारित किया ?

डीजीपी महोदय के द्वारा जारी सूचना पत्र क्रमांक 64/20 थाना प्रभारी व सीएसपी महाराजपुरा की सांठगांठ से जांच प्रतिवेदन 2 माह तक लंबित रहा

परिजनों के द्वारा डीजीपी भोपाल को दिए गए आवेदन दिनांक 14/07/2020 जिसमें जांच अधिकारी नगर पुलिस अधीक्षक महाराजपुरा रवि भदौरिया को जांच अधिकारी बनाकर इस प्रकरण को जांच करने के लिए नियुक्त किया गया लेकिन पुलिस के द्वारा चार्टशीट न्यायालय के समक्ष दिनांक 30/09/2020 को प्रस्तुत करने के उपरांत बाद परिजनों के घर दिनांक 30/09/2020 को नोटिस पहुंचाया जाता है की आपको नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय महाराजपुरा दिनांक 05/10/2020 को 11:00 बजे कार्यालय पहुंचकर अपना बचाव पक्ष प्रस्तुत करें।

  • यहां पर परिजनों के दिमाग में एक सवाल आया कि चार्जशीट के बाद पुलिस कौन सी जांच कर रही है ?

जब परिजनों के द्वारा सी एस पी कार्यालय में दिनांक 05/10/2020 को बचाव साक्ष्य प्रस्तुत किया जा चुका था उसके उसके 2 माह बाद दिनांक 25/11/2020 को नगर अधीक्षक कार्यालय सूचना का अधिकार प्रस्तुत किया जाता है उसके बाद दिनांक 26/ 11/2020 को सीएसपी साहब के पास जब सूचना का अधिकार पहुंचा तब आनन फानन मैं थाना प्रभारी हजीरा आलोक सिंह परिहार (सिंघम) के द्वारा यह बताया जाता है कि अपराधी की ओर से आवेदन इसलिए दिया जा रहा है कि गिरफ्तारी ना हो सके लेकिन श्रीमान जी के द्वारा यह भी बताया जाता है कि हमने 20/08/2020 को आशु तिवारी को घर से फॉर्मर्ली गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश किया। साफ-साफ यह दर्शित होता है कि पुलिस का जांच प्रतिवेदन केवल फाइल में ही थी ग्राउंड पर जीरो । यह जानकारी परिजनों को सूचना का अधिकार से प्राप्त हुई।

  • विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक नरेंद्र चिकारा के द्वारा की गई जांच व माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया चार्जशीट कुछ और ही बयां करता है

विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक नरेंद्र चिकारा के द्वारा मामले की जांच की गई । जिसमें उप निरीक्षक नरेंद्र चिकारा के द्वारा यह बताया गया कि आशु तिवारी को 02/08/2020 को मरघट के पास से गिरफ्तार किया गया। माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया घटना घटने के पहले ही विवेचना अधिकारी नरेंद्र चिकारा के पास 2 जून 2020 को सारे दस्तावेज आ चुके थे । कि आशु तिवारी 25 जून 20 इस अपराध को अंजाम देगा ।

थाना प्रभारी हजीरा,विवेचना अधिकारी के द्वारा किया गया माननीय न्यायालय भ्रमित
  • जेल अधीक्षक केंद्रीय जेल ग्वालियर के द्वारा सूचना के अधिकार में दी गई जानकारी

आंसू उर्फ आशुतोष तिवारी पुत्र श्री अमरनाथ तिवारी हजीरा थाना अपराध क्रमांक 185/2020 धारा-195-क,294,506,34, भादवी के तहत दिनांक 25/09/20 को इस जेल में प्रवेश हुआ

  • पुलिस के लिए यह मामला काफी पेचीदा बनता नजर आ रहा है।
  • 3 अगस्त 2020 से लेकर दिनांक 24 सितंबर 2020 तक कहां रहा आंसू उर्फ आशुतोष तिवारी ?
  • थाना प्रभारी के द्वारा कुछ आवेदन भी गुम किए गए हैं जिसके साबुत पीड़ित परिवार के पास उपलब्ध है पीड़ित परिवार की यह भी मांग है थाना प्रभारी के खिलाफ F.I.R. पंजीबद्ध कर दंडित किया जाए ।

पीड़ित परिवारका कहना है कि षड्यंत्र पूर्वक प्रकरण को पंजीबद्ध किया गया । ऐसा सूत्रों से यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि फरियादी और थाना प्रभारी के बीच काफी अच्छे संबंध है बिजनेस पार्टनर भी रहे हैं पीड़ित परिवार माननीय उच्च न्यायालय मे इसमें सम्मिलित समस्त अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग करेगा व इनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की के लिए न्यायपालिका से गुहार लगाएगा ।

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