फर्जी कोरोना जांच रिपोर्ट मामले में न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज।

संववादाता-अविनाश कुमार गुप्ता

मंझौल/ चेरिया बरियारपुर (बेगूसराय) : फर्जी कोरोना जांच रिपोर्ट मामले में मंझौल एसीजेएम न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी संख्या-117/2021 दर्ज की गई है। जिसमें सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पृथ्वीराज नामजद किया गया है। जानकारी के अनुसार बीते 19 मई को चेरिया बरियारपुर थाना कांड संख्या- 71/2021 राज्य बनाम संजय सिंह के मामले में थाना पुलिस के द्वारा नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई थी। पुलिस के द्वारा गिरफ्तार अभियुक्त बालेश्वर सिंह को कोरोना जांच कराया गया था। जांच के क्रम मे उक्त गिरफ्तार अभियुक्त की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। परंतु उनके शुभचिंतक सीएचसी कर्मियों के द्वारा जेल जाने से बचाने के लिए रिपोर्ट में फर्जी तरीके से हेराफेरी कर निगेटिव रिपोर्ट को पॉजीटिव बना दिया गया था। जहां एसीजेएम प्रथम संतोष कुमार को सीएचसी के पर्ची पर लिखे पॉजीटिव शब्द के स्पेलिंग्स मे की गई गलती तथा टोकन नंबर नहीं रहने के कारण संसय की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। हालांकि न्यायालय के द्वारा उक्त अभियुक्त को प्रशासनिक स्तर पर तैयार आइसोलेशन सेंटर मे एडमिट कराने की बात कहते हुए भेज दिया गया था।

सीएचसी की एक गलती से स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासनिक महकमा बेनकाब – सीएचसी की एक गलती से स्वास्थ्य विभाग ही नहीं पूरा प्रशासनिक महकमा बेनकाब हो गया है। जानकारी के अनुसार सीएचसी से कोरोना जांच मे फर्जी तरीक़े से हेराफेरी पर मंझौल न्यायालय के द्वारा तब संज्ञान लिया गया। जब केस के आईओ आरोपी अभियुक्त को न्यायालय से आइसोलेशन वार्ड में एडमिट कराने सीएचसी पहुंचे। जहां मौजूद चिकित्सक डॉ रामकुमार अपना फर्जी हस्ताक्षर रिपोर्ट पर देखकर भड़क गए। तथा आइसोलेशन वार्ड मे नहीं रखे जाने की बात कहते हुए वापस कर दिया। फलतः कोरोना काल मे जहां सरकार के स्तर से कागज़ पर चलने वाले आइसोलेशन सेंटर का भंडाफोड़ हो गया। वहीं आईओ द्वारा उठाए कदम से सीएचसी मे व्याप्त भ्रष्टाचार का खेल भी उजागर हो गया। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक स्तर पर तैयार आइसोलेशन महज खानापूर्ति साबित होने के कारण पुलिस को सदर अस्पताल बेगूसराय का चक्कर लगाना पड़ा। जहां पहले तो सीएचसी के फर्जी पेपर पर लिखे जांच रिपोर्ट से ही चिकित्सक को बात समझ मे आ गई। इसके बाद दो बार पुलिस की मौजूदगी में वहां किए गए जांच मे निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद सीएचसी कर्मियों की कारस्तानी खुलकर सामने आ गई। इसके उपरांत केस में भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश करने के लिए गंभीरतापूर्वक कांड के आईओ अनुसंधान मे जुट गए।

महज 07 घंटे में पॉजीटिव से निगेटिव पर न्यायालय हुई सख्त – सदर अस्पताल में कोविड टेस्ट महज 07 घंटे में ही पॉजिटिव से निगेटिव होने पर केस में न्यायालय ने गंभीरतापूर्वक लिया। तथा सीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं थाना पुलिस के विरुद्ध कारणपृच्छा का नोटिस जारी कर दिया। जिसके आलोक में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी न्यायालय में अपने स्तर से जांच कर कारणपृच्छा का जबाव सदेह उपस्थित होकर जमा कर दिया। इधर पुलिस के द्वारा दिए गए जबाव में सारा ठीकरा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के विरुद्ध फोड़ दिया। तत्पश्चात न्यायालय के द्वारा सीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पृथ्वीराज व अन्य कर्मि के विरुद्ध अविलंब प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया। फिर न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस आगे की कार्रवाई मे जुट गई है।

निर्दोष फंसे नहीं और दोषी बचे नहीं की तर्ज पर हो कार्रवाई – इस मामले पर चेरिया बरियारपुर के विधायक राजवंशी महतो ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विधायक ने मीडिया से बातचीत करते हुए निर्दोष फंसे नहीं दोषी बचे नहीं के तर्ज पर कार्रवाई करने मांग जिलाधिकारी से किया है। विधायक ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांंच करवाने पर बल दिया। ताकि भ्रष्टाचार मे लिप्त बेलगाम अफसरशाही पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने बताया इस विन्दु पर मैंने सिविल सर्जन से बातचीत की है। सिविल सर्जन ने उक्त मामले में जिलाधिकारी एवं जिला पुलिस कप्तान को प्रतिवेदित किया है। विधायक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए न्यायालय द्वारा उठाए जा रहे कदम की सराहना करते हुए प्रस्न्नता व्यक्त की है।

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