बेगूसराय की आम जनता बस वालों की नजायज किराया वसूली के कारण आज भी हो रही है परेशान, सरकारी महकमा कुम्भकरणी नींद में।

म जनता ने बेगूसराय जिला प्रशासन की इस दिशा में निक्रियता पर उठाने लगी है ऊंगली।

संवाददाता-अविनाश कुमार गुप्ता।

मंझौल,बेगूसराय / आम जनता नाजायज बस किराया उसुली की वजह जह से हो रही है परेशान।यही है आज की हकीकत, सुशासन बाबू की है ये सरकार यानी यह है नितिश कुमार के राज में बखरी भाया मंझौल बेगूसराय बस किराया का आंधा खेल जारी।ना किसी थाने पुलिस का डर ना कोई कानून का है इन्हें किसी प्रकार का भय। किराया वसूली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता कहीं नहीं दिखाई देती है।जिसका नाजायज फायदा बस किराया वसूली के रूप में अक्सर देखने को मिल रही है। इसका ताजा उदाहरण आज भी देखने को मिला। आंखों देखा हाल, न्याय रथ कंपनी के बस नम्बर बी आर 9D2005 के कांटेक्टर के द्वारा बखरी से मंझौल का बस किराया प्रति व्यक्ति 40 रुपये कि दर से नाजायज असूला गया।यह हाल सिर्फ एक बस वालों की नजायज असूली का नहीं है। बताते चलें कि इस संदर्भ में अभी हल ही में माननीय वर्तमान बखरी विधायक सुरेंद्र पासवान ने लिखित आवेदन बेगूसराय जिले के डीएम अरविंद कुमार कुमार को दिया था। जब विधायक के पहल के बाबजूद हालात धात के तीन पात वाली कहावत को ही चरितार्थ कर रही है। अब तो हालत यह है कि आम जनता की आवाज व ऊंगली नितिश कुमार की सरकार पर उठने लगी है। जो जायज ही है। आखरी आम आदमी करें भी तो किया। आखरी बेगूसराय प्रशाशन कुम्भकरणी नींद से कब जागेगी। क्षेत्र की आम जनता ने अब प्रशन करना शुरू कर दिया है, कि क्या बस वालों की नजायज किराया वसूली रोकने के लिए भारत के किसानों की तरह आम लोगों को रोड पर उतरना पड़ेगा? या जनहित में बेगूसराय जिला प्रशासन इस तरह जारी बस वालों की गैर कानूनी किराया वसूली पर को कारवाई कर रोक लगा पाने में सफल होगकर आम जनता को इस करूना काल में गरीब जनता को राहत भी देने का काम कर अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वाह भी करेगीं ? यह प्रशन आम जनता के द्वारा किया गया कोई साधारण प्रशन नहीं है, निश्चित रूप से जनता के प्रशनों का उत्तर प्रशाशनिक रूप से कार्यवाही कर दे देना चाहिए।

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