नई दिल्ली । देश में सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला सामने आया है। इसने विजय माल्या और नीरव मोदी के बैंक घोटाले को भी पीछे छोड़ दिया है। गुजरात की ABG शिपयार्ड कंपनी और उसके पूर्व चेयरमैन ऋषि कमलेश अग्रवाल और अन्य पर 28 बैंकों के साथ 22,842 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। CBI ने इस मामले में ABG शिपयार्ड कंपनी और ऋषि कमलेश के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज की है।
इसे लेकर अब वित्त मंत्री ने कहा कि एबीजी शिपयार्ड को पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में कर्ज दिया गया था और कंपनी का खाता भी उसी के कार्यकाल में 30 नवंबर, 2013 को एनपीए (फंसा हुआ कर्ज) हुआ था। सभी कर्जदाता बैंकों द्वारा मार्च 2014 में कर्ज का पुनर्गठन किया गया था, लेकिन इससे कुछ फायदा नहीं हो सका।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला आइसीआइसीआई बैंक की अगुवाई में करीब दो दर्जन बैंकों के गठजोड़ के साथ धोखाधड़ी के लिए दर्ज किया गया है।
बतादें कि एबीजी शिपयार्ड कंपनी को 2013 से पहले ही कर्ज की ज्यादातर रकम मिल गई थी। बैंक घोखाधड़ी रोकने के लिए मौजूदा सरकार ने 2014 में नीति बनाई थी, जिसमें संदिग्ध खातों के फॉरेंसिक ऑडिट का प्रावधान किया गया था। उसके अगले साल से यह प्रक्रिया शुरू हो गई थी जो अभी भी जारी है।
नई नीति के तहत 50 करोड़ से अधिक बैंक के एनपीए खाते के फॉरेंसिक ऑडिट को अनिवार्य बनाया गया था और इसके लिए सीएमडी को जवाबदेह बनाया गया था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के एनपीए हुए खातों में ज्यादातर कर्ज की रकम 2006 से 2009 के बीच में डाली गई थी।





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